जब हाथ उनका , मैंने अपने हाथों में लिया,
मकसद सिर्फ और सिर्फ उन्हें छूना था,
और अफ़साने मैं हाथों की लकीरों के सुना रही थी,
जैसे एक छोटे से बच्चे को बहका रही थी,
दिल उनके हाथों को चूमने की तमन्ना लिए ,
राजधानी की स्पीड पे था ,
और दोस्तों , हिम्मत साथ छोड़े जा रही थी
उनकी हँसी और वो कातिल नज़रें ,
हाय मैं तो मदहोश हुए जा रही थी,
मेरा नटखट मन ये सोच रहा था ,
आगे क्या होगा जब हाथ ही से ये हाल है,
वो टकटकी लगाए मेरी और देख रहे थे ,
जैसे अपने जीवन के उत्तर, अपनी हाथों की लकीरों में खोज रहे थे ,
बोले क्या कुछ दिखाई दिया ,
या सब अंधकार है ,
हाल क्या बताये तुम्हे तुम्हारी लकीरों का,
जब हाल अपना ही बेहाल है,
उनके हाथों की गर्मी, मैं सारे शरीर में महसूस कर रही थी,
गर हाथ पकड़ा ही था,,, तो कुछ तो था ही सुनाना,
कह दिया की आज मंगलवार है , आज है मना , कुछ भी बताना,
चलो आप...कल आपकी हाथो की लकीरों का हाल बताएँगे ,
कम से कम इसी बहाने..... कल आपको फिर से छू तो पायेंगे,
कम से कम इसी बहाने.....कल आपको फिर से छू तो पायेंगे......
कम से कम इसी बहाने.....कल आपको फिर से छू तो पायेंगे......
इन्ही खट्टी मीठी यादों का नाम ही तो प्यार है....
ये किसी एक का नहीं.... बल्कि सभी दिलों का सार है ........


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